द कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्म के लिए लोकप्रिय सह निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री इन दिनों अपनी आगामी फिल्म द बंगाल फाइल्स को लेकर काफी सुर्खियों में है। बीते दिनों कोलकाता में फिल्म ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम आयोजित किया गया जहां जमकर हंगामा हुआ। निर्देशक के खिलाफ कई एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। विवेक अग्निहोती का कहना है कि फिल्म की रिलीज को लेकर उन्हें धमकियां मिल रही है। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ-साथ उनके परिवार को भी घसीटा जा रहा है। आपको बता दें जहां अपनी फिल्म द बंगाल फाइल्स को लेकर बढ़ते विवाद के बीच निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने दावा किया है
कि उन्हें फिल्म की रिलीज़ को लेकर धमकियां मिली है। जहां पर उन्होंने बता दें कि न्यूज़ एजेंसी से बात करते हुए जहां पर उन्होंने बताया कि विवेक अग्निहोत्री ने खुलासा किया। उनके साथ-साथ उनके परिवार को भी धमकियां मिल रही है। निर्देशक ने कहा मेरी बेटी और बेटे को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने मेरे परिवार को घसीटा है। द कश्मीर फायर्स के रिलीज़ के बाद मेरे नाम पर तीन फतवे जारी किए गए हैं। तब से मैं अपने बच्चों के साथ कार में नहीं बैठा हूं। एक बार भी नहीं हमने साथ में कुछ भी नहीं किया है। मुझे तक कश्मीर फाइल्स बनाने में इतनी परेशानी नहीं हुई जितनी इस फिल्म को बनाने में हो रही है।
उन्होंने कहा कि मुझ पर हमला किया जा रहा है और एक तरह से सोशल मीडिया पर लीचिंग का शिकार बनाया जा रहा है। आपको बता दें जहां विवेक अग्निहोत्री ने अपनी बेटी और पत्नी सहित अपने परिवार को मिल रही धमकियों की निंदा की है। साथ ही कहा कि उनकी यह आगामी फिल्म बंगाली संस्कृत, संगीत और खानपान पर प्रकाश डालती है। बातचीत के दौरान विवेक ने फिल्म का शीर्षक द दिल्ली फाइल्स बंगाल चैप्टर से बदलकर द बंगाल फाइल्स करने के बारे में खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में पोस्टरों में मूल नाम का ही इस्तेमाल किया गया था और यह बदलाव गलतफहमी से बचने के लिए किए गए थे। विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि जब मैं मार्च अप्रैल में पहली बार अमेरिका गया था तो मैंने फिल्म की नेटवर्किंग और मार्केटिंग शुरू की क्योंकि मैं वहां शो करना चाहता था।
जैसे ही मैंने न्यू जर्सी में अपनी पहली अपना पहला भाषण दिया वहां बहुत सारे लोग इकट्ठा हो गए। मैंने घोषणा की कि मेरी फिल्म द दिल्ली फाइल्स बंगाल चैप्टर में आ रही है। उन्होंने में से उन्होंने उनमें से कई मेरे पास आए और पूछा कि क्या फिल्म सिख दंगों पर आधारित है या दिल्ली दंगों पर? मुझे एहसास हुआ कि कम्युनिकेशन की बहुत बड़ी समस्या थी। उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद उन्होंने दर्शकों से संपर्क किया और द बंगाल फाइव को अंतिम रूप देने से पहले फिल्म के शीर्षक के लिए सुझाव लिए। वहीं पर बता दें कि फिल्म द बंगाल फाइल्स 1940 के दशक के दौरान अविवाजित बंगाल में हुई सांप्रदा सं्प्रदायिक हिंसा पर आधारित है। यह फिल्म 5 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। विवेक जी बहुत-बहुत शुक्रिया एनआई से बात करने के लिए। कंट्रोवर्सी से स्टार्ट करते हैं। तो बताइए क्या हुआ? कोलकाता में बंगाल फाइल्स को लेकर आपकी जो फिल्म आने वाली है। क्या हुआ कि कोलकाता का पुलिस का ऑफिसर बोल रहा है कि आपने परमिशन नहीं ली थी।
आप अपनी फिल्म का ट्रेलर वहां पर ल्च करने वाले थे। आपने परमिशन ली थी कि नहीं ली थी सर? अच्छा मैं चलिए एक कॉमन सेंस की बात करते हैं। एक इंडिया के सबसे बड़े फाइव स्टार होटल में आप कल्पना करिए कि इतना बड़ा एलईडी स्क्रीन लग रहा है। सारा प्रोग्राम चल रहा है। उसमें विजुअल्स चल रहे हैं और पूरा कोलकाता का मीडिया डेढ़ 200 लोग बैठे हुए हैं। चलता हुआ प्रोग्राम। क्या ये संभव है बिना परमिशन के करना? संभव नहीं। हम और आप जैसे पॉडकास्ट कर रहे हैं। सडनली कोई घुसा है। अभी पुलिस वाला कहे परमिशन का है। वरना कैसे आप एंटर कैसे कर सकते हैं प्रेमिस? ये सब बातें देखिए गवर्नमेंट्स इंडिया में इतने लूप होल्स हैं
कि गवर्नमेंट के पास इतने पावर्स होते हैं। कुछ भी निकाल सकते हैं। जब जो चाहे कोई भी चीज निकाल सकते हैं। और परमिशन यानी कोई बात करने को तैयार हो। एक आदमी आया उसे तार काट दिए। कहने लगे अब आगे बात आप करिए। अब आप कुछ कर ही नहीं सकते हैं। तो वो पहले से डिसाइडेड था। एक्चुअली मेरे से गलती ये हो गई कि बहुत सारे लोग लिख रहे थे कि आपका तो यहां होने ही नहीं देंगे। हमको मल्टीप्लेक्स जिसमें हम कर रहे थे पहले वो कैंसिल किया गया। जैसे ही मैं एयरपोर्ट पे उतरा मुझे पता चला वो कैंसिल हो गया। हमने दूसरे मल्टीप्लेक्स से कांटेक्ट किया वो कैंसिल हो गया। उन्होंने बोला कि सर हम पॉलिटिकली सर्वाइव नहीं कर पाएंगे यहां पे अगर हमने दिखा दिया तो। तो तो और यही यहां होटल के साथ हुआ। सेम थिंग और उसके बाद मेरे को वही जो टॉप अथॉरिटीज ने मना किया था। मैंने पूछा किसने कहा है?
तो बोला टॉप अथॉरिटी उसी रिलायबल सोर्स ने फिर मुझे बताया कि देयर दे दे हैड अ प्रॉब्लम वि कपल ऑफ़ थिंग्स इन द ट्रेलर और इसलिए उसको बंद किया गया। क्या वजह रही इस फिल्म को बनाने की? बंगाल फाइल्स पहले इसका नाम दिल्ली फाइल्स था। फिर आपने नाम चेंज कर दिया। 1946 में कोलकाता में जो राइट्स हुए थे उसको लेके बनाई गई है। कुछ लोग कहते हैं आप ऐसी पोलराइजिंग फिल्में बनाते हैं जिसमें जिससे हिंदू मुस्लिम में डिवाइड है वो ज्यादा बढ़ता है। अगर कुछ जख्म है वो भर गए हैं या वो वहीं पे हैं। आप उन्हें बार-बार कुरेदने का काम करते हैं। आपको लगता है जख्म मर गए तो पहलवान क्यों हुआ? मुर्शिदाबाद क्यों हुआ? हर दिन हिंदुस्तान के हर टीवी चैनल पर हिंदू मुस्लिम डिबेट क्यों होती रहती है अगर भर गए हैं तो राइट मैं पोलराइज करता हूं अगर आप सोसाइटी में प्रॉब्लम बंद कर दीजिए मैं पोलराइजेशन फिल्म पे नहीं बनाऊंगा जब सोसाइटी ही पोलराइज्ड है एस अ स्टोरी टेलर मेरा काम है ये बताना कि सोसाइटी में क्या चल रहा है सती प्रथा जब होती थी तो लोग उस पर कहानियां लिखा करते थे
आज कास्ट बेस पे फिल्म बनती है क्योंकि फौ्ट लाइन है हमारी तो ये फिल्म बनाने का मकसद ये था मैं एक आपको बात बताना चाहता हूं कि इंसान इंसान की जो हिस्ट्री है चार 5000 साल की ह्यूमंस की उसमें सबसे ज्यादा पर्सक्यूटेड और एनस्लेव्ड अगर कोई सोसाइटी है वो हिंदू सोसाइटी है। करेक्ट लेकिन ये हिंदू जनरेशन यंग जनरेशन को नहीं पता है। आपको एक भी जू बच्चा ऐसा नहीं मिलेगा जिसको होलोकस के बारे में नहीं पता। आपको एक भी ब्लैक बच्चा नहीं मिलेगा जिसको स्लेवरी के बारे में नहीं पता। आपको एक भी एक भी ऐसा जैपनीज बच्चा नहीं मिलेगा जिसको हिरोशिमा और नागासाकी के बारे में नहीं पता। आपको रंडन बच्चा ऐसा नहीं मिलेगा जिसको रंडन जेनोसाइड के बारे में नहीं पता। लेकिन हिंदू बच्चों को अपने ही हिस्ट्री के जेनोसाइड के बारे में नहीं पता। आपने भी अभी जैसे बोला आपकी गलती नहीं है।
मैं भी यही बोलता था ये फिल्म बनाने के पहले कि वो कोलकाता में जो राइट्स हुई थी वो राइट्स नहीं थी। वो जेनोसाइड था। प्लंड जेनोसाइड था। यस प्लंड अनाउंस जेनोसाइड था। बाय मुस्लिम लीग जिन्ना। जिन्ना ने एक कॉल किया कि देखो प्रॉब्लम क्या था? डायरेक्ट एक्शन का कॉल किया जब पार्टीशन नहीं हो रहा था। एंड ही सेड कि इतना खून बहा दो सड़कों में कि डर के मारे ये लोग हमको पाकिस्तान दे। कोलकाता उस वक्त कल्चरल कैपिटल थी। एक इंडस्ट्रियल कैपिटल थी वर्ल्ड की इंडिया की नहीं। कोलकाता बहुत इंपॉर्टेंट सिटी थी। लेकिन कोलकाता में हिंदू मुस्लिम पापुलेशन मार्जिनली हिंदू ज्यादा थे। सो सुहरा वर्दी जो वहां का चीफ मिनिस्टर था उसने शहीद मीनार से अनाउंस किया 16 अगस्त को। 16 अगस्त रमजान का आठवा दिन था और उसने कहा आज के दिन बैटल ऑफ बद्र हुई थी। इस दिन 313 मोहम्मद साहब के साथ 313 लोगों ने बुत परस्त जो काफिर लोग हैं बुत परस्त जो लोग हैं उनको हराया था। हजारों की तादाद के लोग थे। तो उसने बोला कि इतना दो दिन में इतना खून बहा दो कि डेमोग्राफी चेंज हो जाए। हमारी पपुलेशन बढ़ जाए। दैट वाज अ डिक्लेअर्ड थिंग। उसके पफेट्स रिकॉर्डेड है। हमारी फिल्म देखिएगा आप सब चीजें ओरिजिनल है। पफ्लेट्स रिकॉर्डेड है।
उसकी स्पीचेस रिकॉर्डेड है। उसके डॉक्यूमेंट्स रिकॉर्डेड है। पुलिस ने जगहजगह लोगों को जाके ये जो मुस्लिम गार्ड जो यंग यूथ विंग था जो मुस्लिम गार्ड का जिसको मुजीब उर रहमान ने लीड किया। उन्हें सारे पुलिस के तो आर्म्स और वेपन्स और ट्रक्स ले घूम रहे थे सारी जगह पे। तो एक तरह से ट्रैप कर दिया गया हिंदू पपुलेशन को उनको चारों तरफ से। मैं थोड़ा पुश बैक करना चाहूंगा लेकिन उस टाइम तो ब्रिटिश पुलिस हुआ करती थी ना 1946 की ये बात नहीं नहीं अब अब ये देखिए ये बात मैं आपको बताता हूं 24 थाने थे 24 थानों में 22 थानों चीफ मिनिस्टर तो ये था ना 22 थानों में रातों रात ट्रांसफर करके मुस्लिम इंस्पेक्टर थाना इंस्पेक्टर अपॉइंट किया गया अब आप कहेंगे 24 में 22 क्यों दो में क्यों नहीं किया गया बात बचे हुए क्योंकि दो में एंग्लो इंडियन लोगों को रखा गया बाकी की तमाम ऐसे अपडेट जानने के लिए बने रहिए हमारे साथ देखते रहिए नेक्स्ट
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