सन 12 में जो है हल्का-हल्का मेरे को हाथों में दर्द हुआ था। उसके बाद फिर थोड़ा-थोड़ा पैरों में भी होने लगा तो फिर मैंने टेस्ट कराया मैंने तो मेरे को गठियाबाई निकला था। मेरे पहले हाथों में अकराहट रहती थी। मैं बिल्कुल मोड़ नहीं पाती थी। जैसे मैं सोती थी तो बिस्तरे से मैं सुबह में उठ नहीं पाती थी। बिल्कुल बॉडी में अकराहट रहती थी। हाथ पैर बिल्कुल ऐसे होते थे बिल्कुल भारी जैसे मैं चल ही नहीं पाऊंगी। मैं खड़ी नहीं हो पाती थी किचन में और मेरे से कुछ काम नहीं होता था। तो ऐसा लगता था कि जीवन जो है मेरा कैसा हो गया है। मुझे क्या हो गया है? मैं दोबारा में मतलब खड़ी भी हो पाऊंगी या नहीं। मेरा जो छोटा बेटा है
वो हमेशा रोता था त्यौहारों पे कि मेरी मां ठीक हो जाए। बहुत खाया दवाई आयुर्वेदिक सबसे ज्यादा खाया। अंग्रेजी दवाई तो मैंने शायद दो-ती साल खाए होंगे। लेकिन फिर भी मेरे हाथों में बहुत मोटे-मोटे सूजन आ जाती थी। मम्मी को कम से कम 10-12 साल से थी प्रॉब्लम। अर्थराइटिस की जोड़ों में दर्द रहता था। एक टाइम था खुद गाड़ी चला पाती थी। फिर इतना दर्द हो गया हाथ पैरों में कि गाड़ी चलाना भी छोड़ दिया। काम वाली लगा ली थी मम्मी ने क्योंकि हाथ पैरों में काफी दर्द रहता था। काफी दवाइयां खाई अलग-अलग टाइप की। वैसे तो आराम एक दिन के लिए मिल जाता था। फिर दोबारा शुरू जाता था अगले दिन और वो ऐसी है कि उन्हें काम करना पसंद है।
वैसे बैठे रहना नहीं पसंद बिल्कुल भी। तो काफी बुरा लगता था देख के कि मम्मी ऐसे बेड पे ही बैठ गई है। हकीम जी का प्रोग्राम जो है मैं देखती थी। फिर मैं सोची कि एक बार गोंदसिया मंगा के देखती हूं। मैंने गोंदसिया मंगाया। जब से मैंने गोंदसिया खाया तब से मुझे बहुत आराम है। मैं पहले दूसरों पे आश्रित रहती थी। लेकिन अब मैं जो है अपना काम अपने आप करती हूं। अब जो है मैं किचन में मैं सभी काम कर लेती हूं। आटा गंदना है, चाय बनाना है, साग सब्जी काटना है। ऑलरेडी जितने काम होते हैं सब कर लेती हूं। ये मीरा देवी जी को आप देख सकते हैं जो बेड से ही नहीं उठ पाती थी। लेकिन आज वो हमारे साथ चल रही हैं। और देखिए सीधी रोड नहीं है।
मैं आपको दिखाना चाहूंगी। बिल्कुल सीधी रोड नहीं है। एक ऊंचाई है और यहां पे वो 15 से 20 चक्कर अब लगा लेती हैं। और जो उनके पड़ोसी हैं वह क्या कहते हैं? क्या खा रही हो ऐसा जो इतने चक्कर लगा लेती हो? मैंने बताया उन्हें कि मैं हकीम जी की टीके और गोंसिया से मुझे आराम मिला है। उनकी दवाइयों से आराम तो मुझे 75% है। लेकिन जीने की जो इच्छा है वो 100% हो गई। और मेरे बच्चे और मेरे हस्बैंड सब खुश हैं। काफी आराम मिला। इतना आराम मिला कि अपना काम खुद कर लेती हैं। वरना मेरे को ही बुला देती थी मम्मी कि काम कर लो। आ जाओ मेरा हेल्प करा दो। अब चल पा रही है। ठीक है। अपना कहीं भी सीढ़ी पे तो सीढ़ियां भी नहीं चढ़वाती थी बिल्कुल भी। अभी खुद अपने आप सीढ़ियां चढ़ जाती हैं। जो लोग भी बीमार हैं या जो कोई इंटरव्यू मेरा देखेगा तो उन सभी से मेरा यही अनुरोध है।
एक बार हकीम जी की या यूनानी दवाई को इस्तेमाल करके देखें। देहरादून के अमर भारती मोहल्ले में रहने वाली यह हैं मीरा देवी जी जो गठिए के कारण जोड़ों, कमर और घुटनों के दर्द से लंबे समय से जूझ रही थी। देहरादून से लेकर मेरठ तक इलाज करवाने के बाद भी इन्हें राहत नहीं मिली। इस समस्या के कारण जीवन से पूरी तरह मायूस होने वाली मीरा देवी जी की जिंदगी में रोशनी तब आई जब इन्होंने हकीम सुलेमान खान जी से जुड़कर गोंदिसिया और उनकी दूसरी यूनानी दवाइयों का सेवन करना शुरू किया। इन्हें विश्वास ही नहीं था कि इन्हें किसी भी उपाय से राहत मिल जाएगी। लेकिन अब मीरा देवी जी काफी खुश हैं
क्योंकि इनके जीवन में एक बड़ा बदलाव आया है इनकी सेहत देखने और इनकी कहानी आप तक पहुंचाने हम पहुंचे इनके घर देहरादून ये सीढ़ियां भी मैम मुझे दिख रही हैं तो अभी हम चल सकते हैं दोनों साथ-साथ हां जी चलिए चले दर्द तो नहीं होगा पहले मुझे बताइए चलिए कोई नहीं चलिए चढ़ के दिखाइए मुझे तो देख सकते हैं दर्शकों आप मीरा मैम चल पा रही हैं सीढ़ियां तक। अभी आपने देखा कि कैसे वह ऊंचाई के रास्ते पे अभी हमें चल के दिखाया उन्होंने और अब सीढ़ियां देखिए खड़ी सीढ़ियां हैं ये जिन पे वो चल के हमें दिखा रही हैं। तकलीफ बहुत ज्यादा झेली है लेकिन उनकी तकलीफ किस हद तक कम हुई है यही देखिए आप और यह मुमकिन हो पाया है
गोंसिया से। मैम पहले इस तरीके से चल पा रही थी आप सीढ़ियां। पहले नहीं चल पाती थी। मैं तो छत पे आती ही नहीं थी। अच्छा। हां। छत पे आना छोड़ दिया था? मैंने छत में आना छोड़ दिया था। और तो अभी लगता है कि गोंसिया के इस्तेमाल से टी केयर के इस्तेमाल से ताकत भी आई है और जितनी तकलीफ आपने झेली वो भी कम हो गई है। हां जी बिल्कुल उन दोनों से मुझे बहुत आराम है और अब मैं आपके सामने चल रही हूं। ठीक है और जो है बहुत ताकतवर है गोंसिया और टी केयर। पहले सोच पा रही थी कि ऐसे दोबारा कभी चल पाएंगी जब तक आपने गोंसिया टी केयर का इस्तेमाल नहीं किया? नहीं पहले तो मैं नहीं सोचती थी लेकिन अब गोंसिया और टी केयर से जो है मुझे बहुत आराम है। उम्मीद जगा दी है। उम्मीद जगा दिया है।
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फैंस भी अर्जुन और सानिया की सगाई की तस्वीरें देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। भले ही अर्जुन और सानिया दोनों में से किसी ने भी इंगेजमेंट की कोई इंफॉर्मेशन शेयर नहीं की हो, लेकिन इन खबरों के सामने आते ही लोगों ने ऐसे कयास लगाने शुरू कर दिए हैं कि आखिर कब न्यूली एंगेज्ड कपल अपने रिश्ते को ऑफिशियली अनाउंस करेंगे। वहीं अब इन्हीं खबरों के बीच ननंद भाभी की खूबसूरत सी जोड़ी की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। इस फोटो को देखने के बाद फैंस ने ऐसा मानना शुरू कर दिया है कि यह इनसाइड फोटो इंगेजमेंट की है। लेकिन बता दें कि यह सानिया और सारा की फोटो जयपुर में हुई एक शादी की है।
