गर्दन में की वजह से ना हाथ में हो रहा था। ये उंगली है ना सब ऐसी पतली पतली सी हो गई थी और ऐसा स्पाइन पे पीछे भी होने लगा था। ये है ना यहां से लेकर हाथ तक यहां तक आपके दर्द आता था ये पूरा हाथ में दर्द। अच्छा घर में कमाने वाले अकेले आप ही हैं। कब से आप अकेली कमा रही हैं? पांच छ साल हो गए। फिर सर उनको तकलीफ है ना वो चल नहीं सकते थे बराबर। तो फिर घर पे ही है। बेटा वो नाला सोपारा में रहता है। तो आपको लेके नहीं गए वो अपने साथ? नहीं। आजकल मां-बाप किसी को अच्छे नहीं लगते ना ज्यादा। जैसे कि वजन उठाने का रहता था ना तो वो तो मेरे को उठता ही नहीं था। यहां पे ऐसा कुछ बैग वगैरह रखे तभी भी नहीं
मेरा खुद का बैग रहता था ना वो भी रखती थी तो दौड़ होता था। ठीक हो जाएगा ठीक हो जाएगा। होता है कुछ काम ज्यादा किया होता है। फिर एक दिन ज्यादा हो गया तो मैं जरा डॉक्टर के पास गई ना तो वो बता रहे हैं कि इधर आपको नज़ लग रही है ऐसा। तो बोलते हैं ये दवाई ले लो आप एक्सरसाइज करो ठीक हो जाएंगे। उसी दिन तो देखने का चुटकी लेने का मेरे को बहुत अच्छा लगा। चुटकी है तो चलो जरा देखते हैं ना लेके तो मैंने मोबाइल पे वह जो स्क्रीन पे नंबर आता है ना उस पे फ़ किया फिर मैंने मंगाया 8 दिन में मेरे को इतना आराम आया ना मतलब गर्दन में नई दर्द हो रहा था हाथ में जो झुनझुनाहट हो रही थी ना वो कम हो गई और ऐसा मेरे को है
ना एनर्जी कैसे लगता है अपने में ऐसा होने लगा ना मैं एकदम सुस्त सुस्त रहती थी ऐसा काम करने का मन नहीं ऐसा होता था लेकिन जब भी मैंने वो आठ दिन खाई ना तो इतनी फ्रेश होने लगी ना मैं अभी देखो कुछ भी नहीं अभी वजन वजन उठा सकती हूं अभी सब कर सकती हूं ये देखो उंगली भी बराबर हो गई ये तो इतनी पतली हो गई थी कि पूछा अब ये देखो बराबर हो गई है ना और आटा वाटा गती हो तो हाथ में भी कुछ तकलीफ नहीं होती है पहले तो ऐसा ऐसा करती थी ना मैं तो यहां से लेके यहां दौड़ हो जाता था ऐसा पूरा चक्कर भी आ रहा था उसकी वजह से तो हकीम साहब बताते हैं ना कि चक्कर आए तो ऐसे ऐसे करना एक्सरसाइज तो मैं एक्सरसाइज भी मैं बोली मेरे को अच्छा लगा मैं बोला एक्सरसाइज भी करती हूं और जब से कौन सी वाली है तभी से मेरे को चक्कर होकर भी नहीं आता वो एक्सरसाइज जो बता वो एक्सरसाइज भी कर रही हूं
और वो गोंद सिया भी ले रही हूं। तो ये बताइए कि तकलीफ क्या-क्या रहती थी आपको? आप क्या काम नहीं कर पा रही थी या फिर दर्द में भी काम आपको वो करने पड़ रहे थे? जैसे कि वजन उठाने का रहता था ना तो वो तो मेरे को उठता ही नहीं था। मतलब ऐसा गर्दन की वजह से एकदम ये लगता था। अभी देखो कुछ भी नहीं। अभी वजन वजन उठा सकती हूं। अभी सब कर सकती हूं। पहले वजन उठाती यहां पे ऐसा कुछ बैग वगैरह रखे गए अभी भी नहीं। मेरा खुद का बैग रहता था ना वो भी रखती थी तो दर्द होता था। बट अब यह बताइए मुझे कि हकीम साहब से जुड़ना कैसे हुआ आपका? वो क्या मेरे है ना गर्दन में दर्द रहता था। हां तो एक बार मैं दवाई तो लेके आई लेकिन फिर घर पे थी उस दिन तो मैंने टीवी चालू किया हां तो हकीम से का प्रोग्राम आ रहा था ना हम तो उसमें मेरे को बताया ना गोंदसिया लेने का और चुटकी लेने का मेरे को बहुत अच्छा लगा। चुटकी है
तो चलो जरा देखते हैं ना लेके तो मैंने मोबाइल पे वह जो स्क्रीन पे नंबर आता है ना उस पे फ़ किया और वो बोले रॉ मटेरियल है आप लेंगे उसको फिर थोड़ा धूप में सुखा के अब पाउडर करके ले लो चुटकी चुटकी लेना है हम मैं बोली ठीक है हम फिर मैंने मंगाया हम दो चार दिन आठ दिन में मेरे को इतना आराम आया ना हम कि पूछो मत सिर्फ गर्दन में दर्द था गर्दन में की वजह से ना हाथ में हो रहा था अच्छा ये उंगली है ना उस समय ऐसी पतली पतली सी हो गई थी ये वाली हां हां हां और ऐसा स्पाइन पे पीछे भी होने लगा था हां हां हां हां इसके लिए मैंने लिया तो मतलब सब जगह पे पूरा आराम ही होने लगा अच्छा इस गली में जाना है आपका घर यहां से और कितनी दूर है
बस अभी 1 मिनट का रास्ता है अच्छा एक मिनट का रास्ता और है अच्छा तो आपने ये बताया कि आपको गर्दन में तकलीफ रही में प्रॉब्लम और फिर हाथ में भी आग गई थी अच्छा तो हकीम साहब से जुड़ने से पहले आपने दवाई दवाइयां ली इधर मुंबई मैं आपको बताया ना मैं एक बार दवाई लेने को गई उस दिन मैं हमारे इधर मानव कल्याण केंद्र है ना वहां पे ही गई थी मैं हड्डी के डॉक्टर के पास लेकिन उन्होंने दवाई भी दी दवाई ली उसी दिन मैं घर पे थी तो उसी दिन मैं घर पे थी जब भी मैंने प्रोग्राम टीवी पे फ्री रहती हूं ना घर पे तो चल टीवी चला के देखती हूं टीवी चला के देखा तो मैं बोली अरे ये तो अच्छी बातें कर रहे हैं मैं बोली इनको जरा ले लेंगे दवाई तो फिर मैंने तो वो दवाई नहीं खाई क्या जो लेके आई थी आप वो दवाई मैं एक ही बार खाई हां फिर मैंने रख दी ऐसे मेरे को दवाई अच्छी नहीं लगती है। तो मैं बोली रख देती हूं। ये तो थोड़ा सा ही लेना है
तो यही लेके देख लेती हूं। फिर मैंने यही मंगाया। फिर आठ दिन में मेरे को इतना अच्छा लगा ना कि पूछो मत। कैसे क्या नाम लगा? मतलब गर्दन में नहीं दर्द हो रहा था। हाथ में जो झुनझुनाहट हो रही थी ना वो कम हो गई। और ऐसा मेरे को ना एनर्जी कैसा लगता है अपने में? ऐसा होने लगा। अरे ना एकदम सुस्त सुस्त रहती थी। ऐसा काम करने का मन नहीं। ऐसा होता था। लेकिन मैंने आठ दिन खाई ना तो इतनी फ्रेश होने लगी ना मैं कि मेरे को लगा नहीं ले लेंगे तो ठीक है बाद में मैंने मतलब वही चालू रखा फिर मेरे को वहां से घड़ी घड़ी वो लोग फोन करते थे आप कैसी हो आप कैसी हो मैं बोली ठीक हूं ठीक हूं कितना टाइम हो गया आपको कौन सी इस्तेमाल करते हुए
अभी मेरे को डेढ़ महीना हुआ डेढ़ महीना आपको इस्तेमाल करते हो गया ठीक है अच्छा गर्दन के साथ-साथ कहीं और भी गर्दन के साथ ही नहीं हाथ में भी थोड़ा दर्द था और ये उंगुलियां ना एकदम पतली सी हो गई थी अच्छा अच्छा हां और स्पाइन पे भी पूरा दर्द होता था। तो सब क्लियर हो गया। देखो उंगली भी बराबर हो गई। हां हां हां दोनों हाथ दिखाइए। ये तो इतनी पतली हो गई थी कि पूछा मत। हम हां हम तो ये उंगलियों का पतला होना, गर्दन में दर्द होना, स्पाइन में भी प्रॉब्लम होना। तो आप दिखाई इधर-उधर कहीं दिखाई। आपने जैसे कि अभी हम आ रहे थे आपके घर तक तो आपने कहा कि गई थी मैं कहीं दवाई लेने। लेकिन बस वो आप ऐसी ही दवाई लेने चली गई थी।
किसी ने आपको बताया था डॉक्टर के बारे में। मैं खुद ही गई थी। बोली गले में दर्द है तो मैं बोली देखती हूं ना। फिर क्यों? चक्कर भी आ रहा था उसकी वजह से। तो हकीम साहब बताते हैं ना कि चक्कर आए तो ऐसे ऐसे करना। हां एक्सरसाइज। हां। तो मैं एक्सरसाइज भी मैं बोली मेरे को अच्छा लगा। मैं बोली एक्सरसाइज भी करती हूं। फिर मेरे को चक्कर मक्कर भी बंद हो गए। कैसे एक्सरसाइज करती हैं? ऐसे बताती है ना वो। हम ऐसे बताती है ना? वैसा करती हैं आप? हां। तो उससे मेरे को काफी अच्छा लगा। मेरे को इतना मतलब चक्कर आता था गले की वजह से लेकिन वो भी ठीक हो गया।
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